🛕 श्री तीर्थगिरि वडिवेल सुब्रमण्य स्वामी मंदिर
यह मंदिर भगवान मुरुगन (कार्तिकेय / सुब्रमण्य) को समर्पित है
और वेल्लोर शहर के पास
तीर्थगिरि (पुधु
वासूर
हिल) नामक पहाड़ी पर
स्थित है। इसे स्थानीय
लोग तीर्थगिरि मुरुगन मंदिर”के नाम से
भी जानते हैं।
यह स्थान आध्यात्मिक शांति, प्राकृतिक सुंदरता और भक्तिमय वातावरण
के लिए प्रसिद्ध है।
📍 मंदिर कहाँ
स्थित है?
स्थान: वेन्कटापुरम, पुधु वासूर हिल, वेल्लोर, तमिलनाडु , वेल्लोर कैंट रेलवे स्टेशन से लगभग 4–5 किमी
NH-46 (चेन्नई–बेंगलुरु हाईवे) के पास
🚗 मंदिर कैसे जाएँ?
🚆 रेल से
नज़दीकी
स्टेशन: Vellore
Cantonment
* स्टेशन
से ऑटो, टैक्सी या
लोकल बस द्वारा पहाड़ी
के नीचे तक जाया
जा सकता है।
🚌 बस से
वेल्लोर बस स्टैंड से
वेन्कटापुरम / पुधु वासूर जाने
वाली बसें मिलती हैं।
बस से उतरकर
पहाड़ी की ओर पैदल
या ऑटो से जा
सकते हैं।
🚖 टैक्सी / कार
से
वेल्लोर
शहर से सीधा टैक्सी
या अपनी गाड़ी से
पहाड़ी तक पहुँचा जा
सकता है।
🕐 मंदिर के दर्शन का समय:-
आमतौर
पर:
सुबह:
लगभग 6 बजे से दोपहर
तक
शाम:
लगभग 4 बजे से रात
तक
(त्योहारों
के समय विशेष पूजा
के कारण समय बढ़
सकता है)
👉 सुबह जल्दी
जाना सबसे अच्छा होता
है, भीड़ कम और
मौसम ठंडा रहता है।
🛕 मंदिर का महत्व:-
भगवान मुरुगन यहाँ “वडिवेल”रूप में पूजे जाते हैं, जो शक्ति, विजय और ज्ञान के प्रतीक हैं। यह मंदिर पहाड़ी पर
स्थित होने के कारण पालनी और तिरुत्तानी जैसे मुरुगन मंदिरों की याद दिलाता है।
भक्त
यहाँ:
* विवाह
में विलंब
* शिक्षा
* नौकरी
* संतान
प्राप्ति
* और
शत्रु बाधा से मुक्ति
के लिए प्रार्थना करते
हैं।
🗿 विशेष आकर्षण :-
इस क्षेत्र में
हाल के वर्षों में
बहुत ऊँची (लगभग 90 फीट के आसपास)
भगवान मुरुगन की विशाल प्रतिमा
भी
स्थापित
की गई है, जो
दूर से ही दिखाई
देती है। पहाड़ी से
वेल्लोर शहर का सुंदर
दृश्य दिखाई देता है।
🎉 मुख्य त्योहार:-
इस मंदिर में भगवान मुरुगन
से जुड़े सभी बड़े त्योहार
बहुत धूमधाम से मनाए जाते
हैं:
🔱 1. थाईपुसम (Thaipusam) :-
* सबसे
बड़ा उत्सव
* भक्त
कावड़ी, दूध कलश और
विशेष व्रत के साथ
आते हैं।
⚔️ 2. स्कंद षष्ठी
(Skanda Sashti) :-
* 6 दिन
का पर्व
* भगवान
मुरुगन की असुरों पर
विजय का उत्सव
3. पंगुनी उत्रम :-
* भगवान
मुरुगन और देवी देवनाई
के विवाह का पर्व
🪔 4. कार्तिगई दीपम :-
* पूरे
मंदिर और पहाड़ी पर
दीप जलाए जाते हैं
🧭 दर्शन करने
वालों के लिए सुझाव
✔ पहाड़ी
होने के कारण आरामदायक
चप्पल/जूते पहनें
✔ पानी
साथ रखें
✔ मंदिर
में सभ्य और पारंपरिक
वस्त्रपहनें
✔ त्योहार के दिनों में भीड़ अधिक होती है, समय से पहले पहुँचे







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