
🕉️ मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग :-
मल्लिकार्जुन
ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के बारह
पवित्र ज्योतिर्लिंगों में से एक
है। यह आंध्र प्रदेश
के कर्नूल जिले
में
स्थित श्रीशैलम नामक स्थान पर,
कृष्णा नदी के तट
पर और नल्लमाला पर्वत
श्रृंखला के बीच विराजमान
है।
यह
स्थान प्राकृतिक सौंदर्य, घने जंगलों और
आध्यात्मिक शांति के लिए अत्यंत
प्रसिद्ध है। इस ज्योतिर्लिंग
की
विशेषता
यह है कि यहाँ
भगवान शिव के साथ
माता पार्वती भी भ्रमराम्बा देवी
के रूप में पूजित
होती हैं। यही
कारण
है कि यह स्थल
एक साथ ज्योतिर्लिंग औरशक्ति
पीठ दोनों है।
पौराणिक
कथा के अनुसार,
एक
बार भगवान शिव और माता
पार्वती के पुत्रों —
कार्तिकेय
और गणेश —
के
बीच
विवाह को लेकर प्रतियोगिता
हुई। शर्त यह थी
कि जो पहले पूरे
ब्रह्मांड की परिक्रमा करके
आएगा, उसी
का
विवाह पहले होगा।
कार्तिकेय
अपने वाहन मयूर पर
सवार होकर निकल पड़े,
जबकि गणेश जी ने
अपने माता-पिता की
तीन बार
परिक्रमा
कर ली और कहा
कि माता-पिता ही
उनका संपूर्ण ब्रह्मांड हैं। इस प्रकार
गणेश जी विजयी हुए।
यह
देखकर
कार्तिकेय दुखी होकर क्रौंच
पर्वत पर तप करने
चले गए।
भगवान
शिव और माता पार्वती
उन्हें मनाने के लिए वहीं
आए और उसी स्थान
पर निवास करने लगे। तभी
से
भगवान
शिव यहाँ मल्लिकार्जुन और
माता पार्वती भ्रमराम्बा के रूप में
पूजे जाते हैं।
मल्लिकार्जुन
नाम का अर्थ है
– “मल्लि” अर्थात चमेली का फूल और
“अर्जुन” अर्थात भगवान शिव। ऐसा
माना
जाता है कि यहाँ
भगवान शिव को चमेली
के फूल अत्यंत प्रिय
हैं।
इस
मंदिर की स्थापत्य कला
दक्षिण भारतीय द्रविड़ शैली में बनी
हुई है। विशाल गोपुरम,
सुंदर स्तंभ,
प्राचीन
शिलालेख
और मूर्तियाँ इसकी भव्यता को
और बढ़ाती हैं। मंदिर परिसर
में प्रवेश करते ही एक
दिव्य और
शांति
से भरा वातावरण अनुभव
होता है।
यह
मंदिर आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण
माना जाता है। मान्यता
है कि जो भक्त
श्रद्धा और भक्ति के
साथ
यहाँ भगवान मल्लिकार्जुन के दर्शन करता
है, उसके सभी पाप
नष्ट हो जाते हैं
और उसे मोक्ष की
प्राप्ति
होती
है। विशेष रूप से महाशिवरात्रि
श्रावण मास और कार्तिक मास में यहाँ
लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते
हैं।
मंदिर
में प्रतिदिन विभिन्न प्रकार की पूजाएँ होती
हैं जैसे –
अभिषेक,
रुद्राभिषेक,
कुमकुम अर्चना,
नवग्रह पूजा
और
कल्याणम (भगवान शिव और पार्वती
का विवाह उत्सव)। श्रीशैलम को
केवल तीर्थ ही नहीं बल्कि
एक
शक्तिशाली
आध्यात्मिक केंद्र माना जाता है,
जहाँ साधु-संत और
भक्त आत्मिक शांति की खोज में
आते हैं।
इस
प्रकार मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग न केवल धार्मिक
आस्था का केंद्र है
बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और
भक्ति
का अद्भुत प्रतीक भी है।
🌄 श्रीशैलम के
प्रमुख दर्शनीय स्थल :-
श्रीशैलम
केवल मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग के लिए ही
नहीं, बल्कि अपनी प्राकृतिक सुंदरता,
आध्यात्मिक
वातावरण
और ऐतिहासिक स्थलों के लिए भी
प्रसिद्ध है।
🛕 1. भ्रमराम्बा देवी मंदिर :-
यह
मंदिर माता पार्वती को
समर्पित है और 18 महाशक्ति
पीठों में से एक
माना जाता है। यहाँ
माता को
भ्रमराम्बा
के रूप में पूजा
जाता है। भक्तों का
विश्वास है कि यहाँ
दर्शन करने से जीवन
के सभी कष्ट दूर
होते हैं।
🌊 2. श्रीशैलम बांध :-
यह
कृष्णा नदी पर बना
एक विशाल बांध है। यह
भारत के सबसे बड़े
जलविद्युत परियोजनाओं में से एक
है।
यहाँ
से नदी और पहाड़ियों
का दृश्य अत्यंत सुंदर दिखाई देता है। पर्यटक
यहाँ सूर्यास्त का दृश्य देखने
आते हैं।
🦌 3. श्रीशैलम वन्यजीव अभयारण्य :-
यह
भारत के सबसे बड़े
टाइगर रिज़र्व में से एक
है। यहाँ बाघ, तेंदुआ,
हिरण, भालू और अनेक
दुर्लभ पक्षी पाए
जाते
हैं। प्रकृति प्रेमियों के लिए यह
स्वर्ग समान है।
🛕 4. साक्षी गणपति मंदिर :-
मान्यता
है कि जब भक्त
मल्लिकार्जुन के दर्शन के
लिए जाते हैं, तो
भगवान गणेश यहाँ उनका
नाम दर्ज करते
हैं।
इसलिए ज्योतिर्लिंग दर्शन से पहले यहाँ
आना शुभ माना जाता
है।
🌿 5. पालधारा – पंचधारा :-
यह
दो प्राकृतिक जलधाराएँ हैं जो पहाड़ों
से बहती हैं। यह
स्थान अत्यंत शांत और मनमोहक
है। कहा जाता है
कि
आदि शंकराचार्य ने यहाँ तपस्या
की थी।
🛕 6. हठकेश्वर मंदिर :-
यह
भगवान शिव का एक
प्राचीन मंदिर है जो जंगल
के बीच स्थित है।
यहाँ का वातावरण अत्यंत
रहस्यमय
और
आध्यात्मिक है।
🛕 7. भीमुनि कोलानु :-
यह
एक पवित्र जलकुंड है जहाँ ऋषि
भीमुनि ने तप किया
था। स्नान करने से पाप
नष्ट होते हैं ऐसा
विश्वास है।
🛕 8. शिखरम (शिखरेश्वरम) :-
यह
श्रीशैलम का सबसे ऊँचा
स्थान है। माना जाता
है कि यहाँ से
भगवान शिव ने अपने
पुत्र कार्तिकेय को देखा
था।
यहाँ से पूरा श्रीशैलम
दिखाई देता है।
🚶♂️ 9. पातालगंगा :-
यह
कृष्णा नदी तक जाने
का पवित्र मार्ग है। रोपवे और
सीढ़ियों से यहाँ पहुँचा
जा सकता है। यहाँ
स्नान करना
बहुत
पुण्यदायक माना जाता है।
🌼 10. अकामहादेवी गुफाएँ :-
ये
गुफाएँ कृष्णा नदी के पास
स्थित हैं। यहाँ देवी
अकामहादेवी ने तप किया
था।
🏛️ 11. शिवाजी महाराज संग्रहालय और शिवाजी स्पूर्थी
केंद्र :-
यह
संग्रहालय/स्मारक श्रीशैलम-सुन्निपेंटा क्षेत्र में स्थित है
और शिवाजी महाराज की मराठा वीरता,
शासन-
नीति
और आदर्श जीवन को प्रदर्शित
करता है।
शिवाजी
महाराज का श्रीशैलम से
ऐतिहासिक और आध्यात्मिक गहरा
संबंध रहा है,
क्योंकि
उन्होंने 1677-78
में
दक्षिण अभियान के दौरान श्रीशैलम
का दर्शन और ध्यान किया
था। इस स्मृति को
सम्मान देने के लिए
शिवाजी
स्पूर्थी केंद्र की स्थापना 1994 में
की गयी थी।
🏛️12. Chenchu Lakshmi Tribal Museum – श्रीशैलम का अनोखा संग्रहालय
Chenchu Lakshmi Tribal Museum श्रीशैलम का एक महत्वपूर्ण
सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्थल
है जहाँ
आप
स्थानीय जनजातियों, विशेषकर चेंचू आदिवासी समुदाय के जीवन, संस्कृति
और परंपराओं के बारे में
विस्तार
से जान सकते हैं।
📌 स्थान एवं
महत्व
यह
ट्राइबल म्यूज़ियम पाथालागंगा ट्रेल (Patalaganga Trail) के पास स्थित
है, लगभग 1 किमी की दूरी
पर
श्रीशैलम
बस स्टैंड से। यहाँ मुख्य
रूप से चेंचू आदिवासी
और अन्य स्थानीय जनजातियों
की जीवनशैली को
प्रदर्शित
किया जाता है।
नाम
चेंचू लक्ष्मी पर आधारित है,
जो लोककथाओं में नारसिम्हा स्वामी
की पत्नी के रूप में
मानी जाती हैं और
चेंचू
जनजाति
की पहचान से जुड़ी हैं।
🌊13. पातालगंगा ट्रेल ; श्रीशैलम का प्रमुख पवित्र
स्थल
पातालगंगा
एक बेहद लोकप्रिय धार्मिक-प्राकृतिक स्थान है जो श्रीशैलम
में नल्लमाला पहाड़ियों के तल पर
कृष्णा
नदी के किनारे स्थित
है। यह जगह तीर्थयात्रियों
और पर्यटकों के लिए एक
खास अनुभव प्रदान करती है।
🌿 पातालगंगा ट्रेल
क्या है?
पातालगंगा
ट्रेल (Pathalaganga
Trail) वह रास्ता है जो आपको
ऊँचाई पर स्थित मल्लिकार्जुन
ज्योतिर्लिंग
मंदिर
से नीचे कृष्णा नदी
के पवित्र तट (पातालगंगा) तक
ले जाता है। यहाँ
भक्त और पर्यटक धार्मिक
स्नान करने,
प्रकृति
का आनंद लेने और
रोमांचक अनुभव के लिए आते
हैं।
🛕 मुख्य आकर्षण
और अनुभव
🏞️ 1. पवित्र स्नान (Holy Dip)
पातालगंगा
को श्रीशैलम का पवित्र स्नान
स्थान माना जाता है।
भक्तों का विश्वास है
कि यहाँ पानी में
स्नान करने
से
पापों का नाश होता
है और आत्मा शुद्ध
होती है।
🚶♂️ 2. सीढ़ियों या ट्रेल से
नीचे चलना
पातालगंगा
तक पहुँचने के लिए नीचे
लगभग 500-600 सीढ़ियाँ हैं, जो नर्म
सीढ़ियों का मार्ग बनाती
हैं। यह एक
छोटा
लेकिन आनंददायक ट्रेक जैसा अनुभव देता
है।
🚡 3. रोपवे (Ropeway) सुविधा
अगर
आप पैदल कठिन मार्ग
से नहीं उतरना चाहते,
तो पर्यटन विभाग द्वारा रोपवे सुविधा उपलब्ध है। यह रोपवे
आपको
सुरक्षित रूप से और
जल्दी पातालगंगा के पास ले
जाता है, साथ ही
आसपास का सुंदर दृश्य
देखने का
मौका
भी मिलता है।
⛵ 4. बोटिंग (Boating)
पातालगंगा
के पास से बोटिंग
का आनंद भी लिया
जा सकता है, जहाँ
आप कृष्णा नदी के शांत
पानी और
आसपास
के पहाड़ों के दृश्य का
अनुभव कर सकते हैं।