Friday, 6 February 2026

श्री महालक्ष्मी स्वर्ण मंदिर, श्रीपुरम वेल्लोर

 

🛕 श्री महालक्ष्मी स्वर्ण मंदिर, श्रीपुरम (वेल्लोर) :-

श्रीपुरम महालक्ष्मी स्वर्ण मंदिर भारत के सबसे भव्य और दिव्य मंदिरों में से एक है। यह मंदिरतमिलनाडु के

वेल्लोर शहर में स्थित है और इसे महालक्ष्मी माता को समर्पित किया गया है। यह मंदिर अपनी अद्भुत *स्वर्ण

निर्मित संरचना, आध्यात्मिक वातावरण और अनुशासित दर्शन प्रणाली के लिए पूरे विश्व में प्रसिद्ध है।

यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक अनुभव केंद्र भी है, जहाँ भक्त शांति,

विश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव करते हैं।

🌸 माता महालक्ष्मी का महत्व :-

महालक्ष्मी देवी को धन, वैभव, समृद्धि, सौभाग्य और सुख की देवी माना जाता है। वे भगवान विष्णु की

पत्नी हैं। हिंदू धर्म में यह विश्वास है कि जिनके जीवन में महालक्ष्मी का आशीर्वाद होता है, उनके घर में कभी

दरिद्रता नहीं रहती।माता लक्ष्मी केवल धन की ही देवी नहीं, बल्कि वे:

* अच्छे स्वास्थ्य ,* मानसिक शांति ,* पारिवारिक सुख ,* व्यवसाय में उन्नति ,  की भी अधिष्ठात्री हैं।

इसी कारण लाखों भक्त श्रीपुरम मंदिर आकर माता से आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

 मंदिर का स्थान

शहर: वेल्लोर

राज्य: तमिलनाडु

मंदिर परिसर का नाम: श्रीपुरम

वेल्लोर रेलवे स्टेशन से दूरी: लगभग 8 किमी

चेन्नई से दूरी: लगभग 140 किमी

यह मंदिर एक विशाल परिसर में बना हुआ है,जो पूरी तरह शांत, स्वच्छ और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरा रहता

है।

🏗️ स्वर्ण मंदिर की विशेषता:-

इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता है कि यह पूरी तरह शुद्ध सोने से ढका हुआ है।मंदिर की बाहरी और

आंतरिक दीवारों पर असली सोने की परत चढ़ाई गई है। लगभग 1500 किलोग्राम से अधिक शुद्ध सोना इसमें

उपयोग किया गया है।पूरे मंदिर की नक्काशी और डिजाइन वैदिक वास्तु शास्त्र के अनुसार बनाई गई है।

मंदिर का गर्भगृह कमल (Lotus) के आकार में बना हुआ हैक्योंकि महालक्ष्मी कमल पर विराजमान होती

हैं।यह मंदिर देखने में अत्यंत भव्य, चमकदार और दिव्य प्रतीत होता है।

🌿 शांति पथ (Spiritual Walk):-


मंदिर तक जाने के लिए भक्तों को एक विशेष मार्ग से चलना होता है जिसे शांति पथकहा जाता है।

यह मार्ग: लगभग 1.5 किलोमीटर लंबा है, सर्पिल (घुमावदार) आकार में बना हुआ है.* पूरी तरह हरे पेड़-पौधों

से घिरा हुआ है,इस रास्ते पर चलते हुए भक्त:* भगवान का स्मरण करते हैं , मंत्र जाप करते हैं , अपने मन को

शांत करते हैं.इस मार्ग का उद्देश्य यह है कि जब भक्त माता के सामने पहुँचे, तब उसका मन पूरी तरह शुद्ध

और शांत हो।

🛕 गर्भगृह और माता का स्वरूप:-

मंदिर के अंदर माता महालक्ष्मी कमल पर विराजमान रूप में दिखाई देती हैं।उनके चार हाथ होते हैं:

 दो हाथ आशीर्वाद देते हैं, दो हाथों में कमल पुष्प है.माता का चेहरा अत्यंत शांत और करुणामय है।

यहाँ दर्शन करते समय भक्तों को ऐसा अनुभव होता है मानो माता स्वयं उन्हें देख रही हों।

 🕐 दर्शन समय:-

आमतौर पर मंदिर खुला रहता है:* सुबह से रात तक. दर्शन व्यवस्था टोकन और कतार प्रणाली से होती है

भीड़ अधिक होने पर 2 से 4 घंटे का इंतजार हो सकता है, लेकिन पूरा रास्ता छायादार और सुव्यवस्थित होता

है।

🎉 त्योहार और विशेष पूजा:-

यहाँ विशेष रूप से: दीपावली,वरलक्ष्मी व्रतम,नवरात्रि,पूर्णिमा और अमावस्या   पर विशेष पूजा होती है।

इन दिनों माता लक्ष्मी की विशेष आरती और अभिषेक किए जाते हैं।

🌼 आध्यात्मिक वातावरण:-

श्रीपुरम केवल मंदिर नहीं बल्कि एक आध्यात्मिक केंद्र है।

यहाँ:* ध्यान कक्ष,* साधना स्थल ,* शांति क्षेत्र   बनाए गए हैं।यह स्थान व्यक्ति के मन को बहुत शांति देता है।


🙏 क्यों जाएँ श्रीपुरम? जो लोग:

* आर्थिक परेशानी

* नौकरी की समस्या

* पारिवारिक तनाव

* व्यवसाय में नुकसान   से परेशान हैं, उन्हें यहाँ आकर माता लक्ष्मी से प्रार्थना करनी चाहिए।

भक्तों का विश्वास है कि श्रीपुरम में की गई सच्चे मन से की गई प्रार्थना अवश्य फल देती है।

Saturday, 31 January 2026

श्री तीर्थगिरि वडिवेल सुब्रमण्य स्वामी मंदिर

 🛕 श्री तीर्थगिरि वडिवेल सुब्रमण्य स्वामी मंदिर

यह मंदिर भगवान मुरुगन (कार्तिकेय / सुब्रमण्य) को समर्पित है और वेल्लोर शहर के पास तीर्थगिरि (पुधु

वासूर हिल) नामक पहाड़ी पर स्थित है। इसे स्थानीय लोग तीर्थगिरि मुरुगन मंदिरके नाम से भी जानते हैं।

यह स्थान आध्यात्मिक शांति, प्राकृतिक सुंदरता और भक्तिमय वातावरण के लिए प्रसिद्ध है।

📍 मंदिर कहाँ स्थित है?

स्थान: वेन्कटापुरम, पुधु वासूर हिल, वेल्लोर, तमिलनाडु , वेल्लोर कैंट रेलवे स्टेशन से लगभग 4–5 किमी

NH-46 (चेन्नईबेंगलुरु हाईवे) के पास

🚗 मंदिर कैसे जाएँ?

🚆 रेल से  नज़दीकी स्टेशन: Vellore Cantonment

* स्टेशन से ऑटो, टैक्सी या लोकल बस द्वारा पहाड़ी के नीचे तक जाया जा सकता है।

🚌 बस से

 वेल्लोर बस स्टैंड से वेन्कटापुरम / पुधु वासूर जाने वाली बसें मिलती हैं।

 बस से उतरकर पहाड़ी की ओर पैदल या ऑटो से जा सकते हैं।

🚖 टैक्सी / कार से

वेल्लोर शहर से सीधा टैक्सी या अपनी गाड़ी से पहाड़ी तक पहुँचा जा सकता है।

🕐 मंदिर के दर्शन का समय:-

आमतौर पर:

सुबह: लगभग 6 बजे से दोपहर तक

शाम: लगभग 4 बजे से रात तक

(त्योहारों के समय विशेष पूजा के कारण समय बढ़ सकता है)

👉 सुबह जल्दी जाना सबसे अच्छा होता है, भीड़ कम और मौसम ठंडा रहता है।

🛕 मंदिर का महत्व:-

भगवान मुरुगन यहाँवडिवेलरूप में पूजे जाते हैं, जो शक्ति, विजय और ज्ञान के प्रतीक हैं।   यह मंदिर पहाड़ी पर

स्थित होने के कारण पालनी और तिरुत्तानी जैसे मुरुगन मंदिरों की याद दिलाता है।

भक्त यहाँ:

* विवाह में विलंब

* शिक्षा

* नौकरी

* संतान प्राप्ति

* और शत्रु बाधा से मुक्ति के लिए प्रार्थना करते हैं।

🗿 विशेष आकर्षण :-

 इस क्षेत्र में हाल के वर्षों में बहुत ऊँची (लगभग 90 फीट के आसपास) भगवान मुरुगन की विशाल प्रतिमा भी

स्थापित की गई है, जो दूर से ही दिखाई देती है। पहाड़ी से वेल्लोर शहर का सुंदर दृश्य दिखाई देता है।

🎉 मुख्य त्योहार:-

इस मंदिर में भगवान मुरुगन से जुड़े सभी बड़े त्योहार बहुत धूमधाम से मनाए जाते हैं:

🔱 1. थाईपुसम (Thaipusam) :-

* सबसे बड़ा उत्सव

* भक्त कावड़ी, दूध कलश और विशेष व्रत के साथ आते हैं।

⚔️ 2. स्कंद षष्ठी (Skanda Sashti) :-

* 6 दिन का पर्व

* भगवान मुरुगन की असुरों पर विजय का उत्सव

 3. पंगुनी उत्रम :-

* भगवान मुरुगन और देवी देवनाई के विवाह का पर्व

🪔 4. कार्तिगई दीपम :-

* पूरे मंदिर और पहाड़ी पर दीप जलाए जाते हैं

🧭 दर्शन करने वालों के लिए सुझाव

  सुबह जल्दी या शाम को जाएँ

पहाड़ी होने के कारण आरामदायक चप्पल/जूते पहनें

पानी साथ रखें

मंदिर में सभ्य और पारंपरिक वस्त्रपहनें

त्योहार के दिनों में भीड़ अधिक होती है, समय से पहले पहुँचे

Sunday, 25 January 2026

Mallikarjun Jyotirlingam Srisailam

 

🕉️ मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग :-

मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के बारह पवित्र ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यह आंध्र प्रदेश के कर्नूल जिले

में स्थित श्रीशैलम नामक स्थान पर, कृष्णा नदी के तट पर और नल्लमाला पर्वत श्रृंखला के बीच विराजमान है।

 यह स्थान प्राकृतिक सौंदर्य, घने जंगलों और आध्यात्मिक शांति के लिए अत्यंत प्रसिद्ध है। इस ज्योतिर्लिंग की

विशेषता यह है कि यहाँ भगवान शिव के साथ माता पार्वती भी भ्रमराम्बा देवी के रूप में पूजित होती हैं। यही

कारण है कि यह स्थल एक साथ ज्योतिर्लिंग औरशक्ति पीठ दोनों है।


पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्रोंकार्तिकेय और गणेशके

बीच विवाह को लेकर प्रतियोगिता हुई। शर्त यह थी कि जो पहले पूरे ब्रह्मांड की परिक्रमा करके आएगा, उसी

का विवाह पहले होगा।

 कार्तिकेय अपने वाहन मयूर पर सवार होकर निकल पड़े, जबकि गणेश जी ने अपने माता-पिता की तीन बार

परिक्रमा कर ली और कहा कि माता-पिता ही उनका संपूर्ण ब्रह्मांड हैं। इस प्रकार गणेश जी विजयी हुए। यह

देखकर कार्तिकेय दुखी होकर क्रौंच पर्वत पर तप करने चले गए।

भगवान शिव और माता पार्वती उन्हें मनाने के लिए वहीं आए और उसी स्थान पर निवास करने लगे। तभी से

भगवान शिव यहाँ मल्लिकार्जुन और माता पार्वती भ्रमराम्बा के रूप में पूजे जाते हैं।

मल्लिकार्जुन नाम का अर्थ है – “मल्लिअर्थात चमेली का फूल औरअर्जुनअर्थात भगवान शिव। ऐसा

माना जाता है कि यहाँ भगवान शिव को चमेली के फूल अत्यंत प्रिय हैं।


इस मंदिर की स्थापत्य कला दक्षिण भारतीय द्रविड़ शैली में बनी हुई है। विशाल गोपुरम, सुंदर स्तंभ, प्राचीन

शिलालेख और मूर्तियाँ इसकी भव्यता को और बढ़ाती हैं। मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही एक दिव्य और

शांति से भरा वातावरण अनुभव होता है।

यह मंदिर आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि जो भक्त श्रद्धा और भक्ति के

साथ यहाँ भगवान मल्लिकार्जुन के दर्शन करता है, उसके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति

होती है। विशेष रूप से महाशिवरात्रि श्रावण मास और कार्तिक मास में यहाँ लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते

हैं।


मंदिर में प्रतिदिन विभिन्न प्रकार की पूजाएँ होती हैं जैसेअभिषेक, रुद्राभिषेक, कुमकुम अर्चना, नवग्रह पूजा

और कल्याणम (भगवान शिव और पार्वती का विवाह उत्सव) श्रीशैलम को केवल तीर्थ ही नहीं बल्कि एक

शक्तिशाली आध्यात्मिक केंद्र माना जाता है, जहाँ साधु-संत और भक्त आत्मिक शांति की खोज में आते हैं।

इस प्रकार मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और

भक्ति का अद्भुत प्रतीक भी है।

 🌄 श्रीशैलम के प्रमुख दर्शनीय स्थल :-

श्रीशैलम केवल मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी प्राकृतिक सुंदरता, आध्यात्मिक

वातावरण और ऐतिहासिक स्थलों के लिए भी प्रसिद्ध है।

🛕 1. भ्रमराम्बा देवी मंदिर :-

यह मंदिर माता पार्वती को समर्पित है और 18 महाशक्ति पीठों में से एक माना जाता है। यहाँ माता को

भ्रमराम्बा के रूप में पूजा जाता है। भक्तों का विश्वास है कि यहाँ दर्शन करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं।


🌊 2. श्रीशैलम बांध :-

यह कृष्णा नदी पर बना एक विशाल बांध है। यह भारत के सबसे बड़े जलविद्युत परियोजनाओं में से एक है।

यहाँ से नदी और पहाड़ियों का दृश्य अत्यंत सुंदर दिखाई देता है। पर्यटक यहाँ सूर्यास्त का दृश्य देखने आते हैं।


🦌 3. श्रीशैलम वन्यजीव अभयारण्य :-

यह भारत के सबसे बड़े टाइगर रिज़र्व में से एक है। यहाँ बाघ, तेंदुआ, हिरण, भालू और अनेक दुर्लभ पक्षी पाए

जाते हैं। प्रकृति प्रेमियों के लिए यह स्वर्ग समान है।

🛕 4. साक्षी गणपति मंदिर :-

मान्यता है कि जब भक्त मल्लिकार्जुन के दर्शन के लिए जाते हैं, तो भगवान गणेश यहाँ उनका नाम दर्ज करते

हैं। इसलिए ज्योतिर्लिंग दर्शन से पहले यहाँ आना शुभ माना जाता है।


🌿 5. पालधारापंचधारा :-

यह दो प्राकृतिक जलधाराएँ हैं जो पहाड़ों से बहती हैं। यह स्थान अत्यंत शांत और मनमोहक है। कहा जाता है

कि आदि शंकराचार्य ने यहाँ तपस्या की थी।


🛕 6. हठकेश्वर मंदिर :-

यह भगवान शिव का एक प्राचीन मंदिर है जो जंगल के बीच स्थित है। यहाँ का वातावरण अत्यंत रहस्यमय

और आध्यात्मिक है।


🛕 7. भीमुनि कोलानु :-

यह एक पवित्र जलकुंड है जहाँ ऋषि भीमुनि ने तप किया था। स्नान करने से पाप नष्ट होते हैं ऐसा विश्वास है।

 🛕 8. शिखरम (शिखरेश्वरम) :-

यह श्रीशैलम का सबसे ऊँचा स्थान है। माना जाता है कि यहाँ से भगवान शिव ने अपने पुत्र कार्तिकेय को देखा

था। यहाँ से पूरा श्रीशैलम दिखाई देता है।


🚶‍♂️ 9. पातालगंगा :-

यह कृष्णा नदी तक जाने का पवित्र मार्ग है। रोपवे और सीढ़ियों से यहाँ पहुँचा जा सकता है। यहाँ स्नान करना

बहुत पुण्यदायक माना जाता है।

🌼 10. अकामहादेवी गुफाएँ :-

ये गुफाएँ कृष्णा नदी के पास स्थित हैं। यहाँ देवी अकामहादेवी ने तप किया था।

🏛️ 11. शिवाजी महाराज संग्रहालय और शिवाजी स्पूर्थी केंद्र :-

यह संग्रहालय/स्मारक श्रीशैलम-सुन्निपेंटा क्षेत्र में स्थित है और शिवाजी महाराज की मराठा वीरता, शासन-

नीति और आदर्श जीवन को प्रदर्शित करता है।


शिवाजी महाराज का श्रीशैलम से ऐतिहासिक और आध्यात्मिक गहरा संबंध रहा है, क्योंकि उन्होंने 1677-78

में दक्षिण अभियान के दौरान श्रीशैलम का दर्शन और ध्यान किया था। इस स्मृति को सम्मान देने के लिए

शिवाजी स्पूर्थी केंद्र की स्थापना 1994 में की गयी थी।

🏛️12.  Chenchu Lakshmi Tribal Museum – श्रीशैलम का अनोखा संग्रहालय

Chenchu Lakshmi Tribal Museum श्रीशैलम का एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्थल है जहाँ

आप स्थानीय जनजातियों, विशेषकर चेंचू आदिवासी समुदाय के जीवन, संस्कृति और परंपराओं के बारे में

विस्तार से जान सकते हैं।

📌 स्थान एवं महत्व

 यह ट्राइबल म्यूज़ियम पाथालागंगा ट्रेल (Patalaganga Trail) के पास स्थित है, लगभग 1 किमी की दूरी पर

श्रीशैलम बस स्टैंड से। यहाँ मुख्य रूप से चेंचू आदिवासी और अन्य स्थानीय जनजातियों की जीवनशैली को

प्रदर्शित किया जाता है।

नाम चेंचू लक्ष्मी पर आधारित है, जो लोककथाओं में नारसिम्हा स्वामी की पत्नी के रूप में मानी जाती हैं और चेंचू

जनजाति की पहचान से जुड़ी हैं।

🌊13.  पातालगंगा ट्रेल ; श्रीशैलम का प्रमुख पवित्र स्थल

पातालगंगा एक बेहद लोकप्रिय धार्मिक-प्राकृतिक स्थान है जो श्रीशैलम में नल्लमाला पहाड़ियों के तल पर

कृष्णा नदी के किनारे स्थित है। यह जगह तीर्थयात्रियों और पर्यटकों के लिए एक खास अनुभव प्रदान करती है।

🌿 पातालगंगा ट्रेल क्या है?

पातालगंगा ट्रेल (Pathalaganga Trail) वह रास्ता है जो आपको ऊँचाई पर स्थित मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग

मंदिर से नीचे कृष्णा नदी के पवित्र तट (पातालगंगा) तक ले जाता है। यहाँ भक्त और पर्यटक धार्मिक स्नान करने,

प्रकृति का आनंद लेने और रोमांचक अनुभव के लिए आते हैं।

🛕 मुख्य आकर्षण और अनुभव

🏞️ 1. पवित्र स्नान (Holy Dip)

पातालगंगा को श्रीशैलम का पवित्र स्नान स्थान माना जाता है। भक्तों का विश्वास है कि यहाँ पानी में स्नान करने

से पापों का नाश होता है और आत्मा शुद्ध होती है।

🚶‍♂️ 2. सीढ़ियों या ट्रेल से नीचे चलना

पातालगंगा तक पहुँचने के लिए नीचे लगभग 500-600 सीढ़ियाँ हैं, जो नर्म सीढ़ियों का मार्ग बनाती हैं। यह एक

छोटा लेकिन आनंददायक ट्रेक जैसा अनुभव देता है।

🚡 3. रोपवे (Ropeway) सुविधा

अगर आप पैदल कठिन मार्ग से नहीं उतरना चाहते, तो पर्यटन विभाग द्वारा रोपवे सुविधा उपलब्ध है। यह रोपवे

आपको सुरक्षित रूप से और जल्दी पातालगंगा के पास ले जाता है, साथ ही आसपास का सुंदर दृश्य देखने का

मौका भी मिलता है।

4. बोटिंग (Boating)

पातालगंगा के पास से बोटिंग का आनंद भी लिया जा सकता है, जहाँ आप कृष्णा नदी के शांत पानी और

आसपास के पहाड़ों के दृश्य का अनुभव कर सकते हैं।